जनसेवक लालबत्ती पर सवार, चुनाव बाद जनता फिर लाचार
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| Rahul Tripathi |
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सड़क किनारे पान की गुमटी में बैठा रामेश्वर वहां से गुजरती सायरन लगी गाड़ियों की ओर इशारा करते हुये कहता है कि इससे अच्छे तो पहले वाले ही विधायक जी अच्छे थे अब तो दिन में चार बार मंत्री जी की 10-15 कारों का रेला यहां से गुजर कर दिमाग खराब करता है। तभी वहां पास के गांव के नौजवान ने कहा कि मंत्री जी से जब नल लगवाने को कहा तो उन्होंने अपने एक शर्गिद की ओर इशारा करते हुये कहा वहां जाकर नाम लिखवा दो जब नल आयेगे तो देख लेगें। तभी वहीं पान मसाला खरीद रहे एक और अधेड़ व्यक्ति ने कहा इस सरकार ने चुनाव पूर्व वादे तो बहुत किये,लेकिन शायद ही कोई पूरा हो, हॉ गुण्डई तो देख रहे हो टैम्पों से लेकर सब अड्डों पर छुटभैया नेताओं के चापलूस दिनभर भद्दी गालियां देकर वसूली कर रहे हैं पुलिस मूक दर्शक बनकर रह गई है। लूटपाट, सरकारी कार्याें में बांधा तो इसके कार्यकर्ताओं का मुख्य लक्षण है। यह सुनकर फलों का ठेला लगाये युसुफ ने कहां कि कल ही युवा मुख्यमंत्री कानपुर पुलिस लाइन आये थे वहां एक बड़ी-बड़ी सेव रखे युवक ने एसपी को भद्दी गालियां दी क्योकि वह मुखिया के सुरक्षा घेरे को तोड़कर पैर छूने के लिये आ गया था। एसपी भी खामोश होकर वहां से चला गया।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुये कुछ सप्ताह ही बीते हैं पूर्ववर्ती सरकार के जुल्मों से निजात पाने के लिये लोगों ने वर्तमान सरकार को बहुमत दिया, लेकिन जीते जनसेवक वातानुकुलित लालबत्ती में घूमकर जमीन से जुड़े लोगों को चिड़ा रहे हैं। ये वास्तविक वाक्या बिल्हौर और रसूलाबाद विधान क्षेत्रों का है उक्त क्षेत्र कानपुर के हैं। निर्धन लोग जहां दलालों के जाल में फंस रहे हैं वहीं कुछ पीड़ित लोग मंत्रियों के दफतरों-घरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। चुनाव पूर्व किये गये वादे उनकी प्राथमिकता में सबसे नीचे आ चुके हैं। नगर-गांव के प्रथम आगमन पर विधायक से मंत्री जैस प्रतिष्ठा वाले पद पर आसीन होने पर भी ये प्रशानिक अफसरों को खुलेआम चुनौती देते नही थक रहे हैं। इस अशोभनीय दशा से खुले आम लोकतांत्रिक व्यवस्था धुमिल हो रही है।
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